Sunday, 18 October 2020

गजल

गजल-दिलीप कुमार वर्मा

2122 2122 212  

जेन खातिर घरजियाँ आये हवँव। 
का बतावँव का इहाँ पाये हवँव।  

मत मया करहू कभू धनवान ले। 
मँय कहानी प्यार के लाये हवँव। 

सेज मा मखमल बिछे हे जान लव। 
मँय चटाई बस इहाँ पाये हवँव। 

खीर पूड़ी रोज बनथे तो इहाँ।
रात के बासी अभी खाये हवँव। 

सब इहाँ आराम से राहत हवय। 
मँय बने कोल्हू फँदा धाये हवँव।  

शेरनी के मांद ले तँय आ जबे। 
मँय फँसे ससुराल घबराये हवँव।   

सब सुते हावय इहाँ आराम से। 
मँय कुकुर कस रात नरियाये हवँव। 

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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