Saturday, 3 October 2020

पञ्चचामर छंद

पञ्चचामर छंद 

12  12 12  12 12  12 12 12

यहाँ वहाँ जहाँ कहीं, उठाय नैन देख लो। 
हरीभरी वसुंधरा, सुहाय नैन देख लो।  

इधर उधर चले चलो, सभी जगा बहार है।   
कहीं मिले पहाड़ तो, कहीं मिले पठार है। 

कहीं मिलाय वन घने, कहीं नदी की धार है। 
कहीं दिखाय झील तो, दिखाय खेत खार है। 

चहक चहक सुना रहा, जहाँ विहंग तान भी। 
पवन चले सरर सरर, सुनाय गीत गान भी। 

कहीं दहाड़ शेर की, कहीं चिंघाड़ गज रहे।  
दिखाय मोर नाच जब, अकाश मेघ बज रहे।  

कभी उमंग से भरे, निकल चलो डगर डगर। 
बहार देखते चलो, रहे समय कहीं अगर।

रचानाकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़




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