Sunday, 18 October 2020

जनउला

जनउला  

1
बरसा के दिन मा बने,गरमी मा उड़जाय। 
मटक मटक झन रेंगबे,देही तुरत गिराय। 

2
बिन के लाने फूल ला,मरकी मा दे बोर। 
भाप बना पी देख ले,होस उड़ाही तोर। 

3
देखे मा चिरई हरे, जादा नइ उड़ियाय।। 
होत बिहानी जाग के,सब ला इही जगाय। 

4
करिया बेनी कस रहे,मिले ओर ना छोर। 
पक्का चुंदी संग मा,जइसे लामे डोर। 

5
बिहना लालम लाल हे, संझा लालम लाल। 
दिनभर नीला ओ दिखे, रतिहा लागय काल। 

6
नारी मन जुरियाय हे, ओखर चारो अंग। 
झूल झूल खींचत हवय, जइसे माते जंग। 

उत्तर:-1चिखला  2 मउहा 3 कुकरा 4 सड़क 5 आसमान 6 कुँआ 

दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार

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