जनउला
1
बरसा के दिन मा बने,गरमी मा उड़जाय।
मटक मटक झन रेंगबे,देही तुरत गिराय।
2
बिन के लाने फूल ला,मरकी मा दे बोर।
भाप बना पी देख ले,होस उड़ाही तोर।
3
देखे मा चिरई हरे, जादा नइ उड़ियाय।।
होत बिहानी जाग के,सब ला इही जगाय।
4
करिया बेनी कस रहे,मिले ओर ना छोर।
पक्का चुंदी संग मा,जइसे लामे डोर।
5
बिहना लालम लाल हे, संझा लालम लाल।
दिनभर नीला ओ दिखे, रतिहा लागय काल।
6
नारी मन जुरियाय हे, ओखर चारो अंग।
झूल झूल खींचत हवय, जइसे माते जंग।
उत्तर:-1चिखला 2 मउहा 3 कुकरा 4 सड़क 5 आसमान 6 कुँआ
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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