दिलीप कुमार वर्मा के सवैया छंद
मंदार माला सवैया
झण्डा ल थाम्हे चले जी सिपाही,रखे जेन हा देश के आन हे।
जेहा उठाये ग रक्षा के बीड़ा,त जानो उही मा रहे जान हे।
कोनो दिखा आँख पाही कभू ना,तभे देश के जी बढ़े शान हे।
ओला सबो देश वासी सराहे,करे जेन रक्षा रखे मान हे।
सर्वगामी सवैया
सेवा करे ले सिपाही न भागै, किसानी करे ते कहाँ भाग जाही।
देये सबो एखरे लोग खावै,कहाँ ले किसानी बिना खाय पाही।
खाली रहे पेट काहीं न होवै,भरे पेट बैरी ल धुर्रा चटाही।
दाई के सेवा करे जे सिपाही,उहू हा किसानी ल माथा नवाही।
अभार सवैया
बाई कहे मान ले बात जोही, न दारू ग पीबे कभू तें धनी मोर।
जोड़े सबो धान पैसा सिराथे,भिखारी बनाथे कटोरा धरे खोर।
काया रहे ना ग माया रहे जी,परे खाट बीमार रोथे रटा टोर।
जादा चले जी कहाँ जिंदगानी,मरे आदमी हा जवानी रहे घोर।
रचानाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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