Sunday, 18 October 2020

गीत

गीत- दिलीप कुमार वर्मा

अरे कोरोना का करिडारे, जग ला नाच नचा दे रे। 
आये तँय हा चीन देश ले, घर घर उधम मचा दे रे। 

सहमे सहमे घर मा खुसरे, सोंचत हावय नर नारी। 
तहीं बता दे बाँचे खातिर , काय करय सब बेचारी।
कतको खटिया धरे परे हे, कतको खाय पचा दे रे। 

मंदिर मसजिद ताला लटके, सुन्ना डगर डगर भारी। 
गाड़ी मोटर सुसतावत हे, मनखे के हे लाचारी। 
थम गे ये जिनगी के पहिया,  जाके दूर बचा दे रे।

दवा बनाये सबो भिड़े हे, मगर पार नइ पावत हे। 
बाढ़त जावत हे बीमारी , कतको जान गंवावत हे।  
भय के कारण सब सहमे हे, बहुंते रार मचा दे रे। 

गीतकार- दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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