जनउला
1
घर के चौकीदार बन,खड़े रहे दिनरात।
बिन सरके खुसरे नही,मनखे आवत जात।
कपाट
2
सोना पर सोना नहीं,रहे सोन कस रंग।
चाँदी भीतर मा भरे,तेखर बर हो जंग।
धान
3
सूजी धर डॉक्टर चले,देख सबो घबराय।
जेला भी ओ टोंच दय,तन आगी बर जाय।
बिच्छू
4
रहिथे तरिया बीच मा,जइसे थारी काँस।
पानी हर लोटय नहीं,नार गड़े जस फाँस।
पुरइन पाना
5
चितकबरी कस तन रहे,माँस खून हे लाल।
लइका करिया होय जी, लागय स्वाद कमाल।
कलिंदर
6
कतको येला रोक ले,पर ये रुक नइ पाय।
रसता अपन बनाय के,जोही सँग मिल जाय।
जोही सँग मिल जाय, गीत रसता भर गावय।
पर जब ये गुसियाय, जान फिर आफत लावय।
सब ला सँग ले जाय,राह मिल जावय जतको।
जेमन भी टकराय,समा गे येमा कतको।
नदिया
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदा बाज़ार
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