बाल कविता
कान हलावत हाथी आगे।
लम्बा सूँड़ सबो ला भा गे।
धम्मस-धम्मस रेंगत राहय।
पान पतउवा खाना चाहय।
मुड़ी गड़ाये भालू करिया।
झामत आवय परिया तरिया।
लम्बा-लम्बा बाल बढ़ाये।
आगू राह नजर नइ आये।
रहे ज़ेबरा चिक्कन भारी।
पूरा तन भर धारी -धारी।
घोड़ा जइसन काया सुग्घर।
चंदा जइसे उज्जर-उज्जर।
हिरन उछल के आगू आगे।
लागय कोनो ला ड़र्रागे।
कान खड़ा कर भाँपन लागे।
जाने काखर आहट पागे।
सुन दहाड़ जंगल थर्रागे।
येती ओती सबझन भागे।
पूँछ हलावत शेर पधारे।
राजा ले परजा सब हारे।
रचनाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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