मुक्तक
दे रहा आवाज अब तो लौट आजा।
गर वतन पे नाज अब तो लौट आजा।
क्या रखा परदेश में जो भा गया है।
छोड़ कर सब काज अब तो लौट आजा।
सुन सुनाता हूँ सुहानी बात अपनी
क्या हँसी थी कल बिताई रात अपनी।
चाँद था आकाश दूजा था जमी पे।
मिल गया मुझको हँसी शौगात अपनी।
रचानाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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