मुक्तक
बना के देख शौचालय,मजा हर रोज आयेगा।
तसल्ली भी मिले तुझको,अकेला आप पायेगा।
झुकेगा ना कभी भी शर,कहीं आहट नही होगी।
मजा क्या है अकेले में,सहीं में जान जायेगा।
मुझे खामोश रखने को,सदा आँसू बहाती है।
कहूँ जो बात उनसे तो,हमेसा रूठ जाती है।
करू अब क्या बता मुझको,खुशी परिवार में लाने।
परूँ क्या पाँव उनका जो, सदा मुझको सताती है।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
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