छप्पय छंद
हमी हरन भगवान, हमी शैतान तको अन।
अगर करम हे नेक, त हम इंशान तको अन।
जइसन मन के सोंच, रूप तइसन बन जाथे।
नेक सोंच भगवान, बुरा शैतान बनाथे।
सुग्घर रखव विचार ला, नेकी करलव काम।
बन जावव इंशान सब, भजलव सीता राम।
रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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