Sunday, 18 October 2020

अमृत ध्वनि छंद

अमृत ध्वनि छंद 

मन से सबकुछ हार कर,जीत सका है कौन। 
लगता अथक शरीर भी,हो जाता है मौन। 

हो जाता है,मौन सोंच भी,जड़ तन होता। 
वीराने में,बैठ अकेला,केवल रोता। 
चाहत है गर,लड़ने की तो,हार न तन से। 
जीत सका वो , हारी बाजी, चंगे मन से। 

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा

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