नाचत रहिगे बेंदरा, तड़फत रहिगे गाय।
शोर चिरइया मन करे, शेर चले जब आय।1।
आँखी, हृदय, धड़कन, काल
टस ले मस नइ हो सके, माढे रहिगे ठाठ।
लेगइया धर लेगथे, पूरा होवय पाठ।2।
मृत्यु
कभू निकल देखय नही, करत हवस का काम।
मालिक निकले जेन दिन, बिरथा होही चाम।3।
आत्मा
आवत जावत जब रहे, तब तक रहिथे आस।
जे दिन आना बंद हो, तन होथे फिर नास।4।
साँस
चटकारा लेवत रथे, जब तक तन में जान।
जम्मो मर जावय भले, स्वाद जाय नइ मान।5।
जीभ
मोर रहत करले सबो, जतका करना काम।
अथक होय जे दिन कका, नइ पाबे फिर दाम।6।
हाथ
माँगत रहिथौं मँय सदा, पूरा थैली खोल।
अगर चलाना देह हे, दे-दे कुछ मत बोल।7।
पेट
चीर फाड़ करते रहूँ, जबतक देबे काम।
बिना जतन मँय झड़ जहूँ, फिर मुख पाय अराम।8।
दाँत
चार चाँद सूरत लगे, माथा तक दमकाय।
जे दिन उड़ जय ताज ये, चिन हारी मिट जाय।9।
बाल
लम्बा छोटे छेपका, सब बर होथे शान।
टेढ़ा मेढ़ा तक रहे, बन जाथे पहिचान।10।
नाक
रचानाकार- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
No comments:
Post a Comment