Tuesday, 27 October 2020

गजल

गजल-दिलीप कुमार वर्मा

बहरे रमल मुसद्दस मख़बून मुसककन
फ़ाइलातुन फ़यलातुन फ़ेलुन

2122 1122 22   

मोर अँगना म सगा आये हे। 
कोन टूरी ल भगा लाये हे। 

देख थे खोर ला घेरी बेरी। 
का जनी कोन ल घबराये हे। 

कब के लाँघन हवे पहुना मोरो।
घेंच के आत ले वो खाये हे। 

टूरा हावय भले बिटबिट करिया। 
टूरी ला चाँद असन पाये हे। 

एक दिन घर म पुलिस आ धमके। 
देख मोला बड़ा धमकाये हे। 

का जनी काय करे हँव गलती।
सोच के मन बड़ा पछताये हे। 

जेन अपराध करे पकड़ा थे।
जेल मा जाय के लुलवाये हे।

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़




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