चाँउर के पकवान (जयकारी छंद)14-11-19
चाँउर के बनथे पकवान,आज बतावत हँव तँय जान।
कहना ला सिरतो तँय मान, चाँउर के फर होथे धान।
चाँउर ले जी भात बनाव,बासी बोर गटा गट खाव।
दूध डार के खीर पकाव,या तसमइ के मजा उड़ाव।
भात बचे ता बने बघार,जीरा फोरन के तँय डार।
या अंगाकर रोटी मार,नहि ते भात बरी ला गार।
चाँउर के जी पीस पिसान,चौसेला चिक्कट हे जान।
दूध फरा सुग्घर ले छान,या पतला पापड़ जस पान।
पातर पातर फरा बनाव,मोठ मोठ मुठिया ला खाव।
चीला बनथे धीमा ताव,चटनी सँग खा ले के चाव।
चाँउर ले पोहा बन जाय,नोनी बाबू अबड़े खाय।
मिच्चर तक मा रहे मिलाय, मुर्रा लाडू सुग्घर भाय।
अँइठे अँइठे मुरकू जान,झटपट बनत हवय पकवान।
कुर्रम कुर्रम सबझन खान,लइका पन मा मजा उड़ान।
लाई के चमकत हे भाग,बने ओखरा दे के पाग।
मेला मा सुनले तँय राग,पोंगा कहिथे अब तो जाग।
खलबत्ता मा चाँउर कूट,थोक थोक जावय जी टूट।
चपके मा जब जाही जूट,मजा अइरसा के तँय लूट।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
No comments:
Post a Comment