Wednesday, 14 October 2020

रोला छंद

""कहो क्या तुमसे कह दूँ"" 

मेरे मन की बात, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
मन मे जो जज्बात, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
बीती कैसी रात, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
वो पहिली बरसात, कहो क्या तुमसे कह दूँ।  

कैसे थे हालात, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
पूरे घण्टे सात, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
भीगी पूरी रात, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
कैसी थी बरसात, कहो क्या तुमसे कह दूँ।

कैसे थे आजाद, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
खुशियों से आबाद, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
तन मन थे आल्हाद, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
रहा नही अवसाद, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 

तनमन डाँवा डोल, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
कितने मीठे बोल, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
घूँघट के पट खोल, कहो क्या तुमसे कह दूँ।  
मिले नही जो मोल, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 

क्या-क्या थे तब खास, कहो क्या तुमसे कह दूँ।  
कैसी अपनी साँस, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
रखे हुए हो आस, कहो क्या तुमसे कह दूँ। 
तोड़ सभी विश्वास, कहो क्या तुमसे कह दूँ।

रचनाकार-दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़

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