Sunday, 18 October 2020

घनाक्षरी

घनाक्षरी 

बरा या सोंहारी खाले,ठेठरी ल तें पचाले,
खुरमी ल खाले संगी,गाबे गुन गान जी। 

चीला की खपुर्रि खाबे, पतला तवा के पाबे,
अंगाकर खाले संगी,चटनी म सान जी। 

फरा मुठिया ला खाले,बोबरा बने बनाले , 
गुझिया बनाये हवे, झट देवों लान जी। 

छत्तीसगढ़िया रोटी,तनिक न रहे खोटी, 
मन भर खाबे बाबू,जाबे पहिचान जी।

भाखा के ओ मान राखे,आन बान शान राखे, 
जग पहिचान राखे,नाम ओ कमाये हे। 

सब ला मिलाये बर, संग मा चलाये बर, 
जग ला जगाये बर, गीत मीठ गाये हे।  

बड़ा मीठ मीठ बोली,करे ओ हँसी ठिठोली, 
शब्द रस घोली घोली,सब ला पिलाये हे। 

नाम लछिमन रहे,सब मस्तूरिहा कहे,  
जन जन के मयारू,तेन याद आये हे। 

रचना कार- दिलीप कुमार वर्मा 
जिला बलौदा बाजार छत्तीसगढ़

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