घनाक्षरी
बरा या सोंहारी खाले,ठेठरी ल तें पचाले,
खुरमी ल खाले संगी,गाबे गुन गान जी।
चीला की खपुर्रि खाबे, पतला तवा के पाबे,
अंगाकर खाले संगी,चटनी म सान जी।
फरा मुठिया ला खाले,बोबरा बने बनाले ,
गुझिया बनाये हवे, झट देवों लान जी।
छत्तीसगढ़िया रोटी,तनिक न रहे खोटी,
मन भर खाबे बाबू,जाबे पहिचान जी।
भाखा के ओ मान राखे,आन बान शान राखे,
जग पहिचान राखे,नाम ओ कमाये हे।
सब ला मिलाये बर, संग मा चलाये बर,
जग ला जगाये बर, गीत मीठ गाये हे।
बड़ा मीठ मीठ बोली,करे ओ हँसी ठिठोली,
शब्द रस घोली घोली,सब ला पिलाये हे।
नाम लछिमन रहे,सब मस्तूरिहा कहे,
जन जन के मयारू,तेन याद आये हे।
रचना कार- दिलीप कुमार वर्मा
जिला बलौदा बाजार छत्तीसगढ़
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