Sunday, 9 February 2020

मुक्तक

मुक्तक 

विदाई की घड़ी में हम,कहें अब क्या बताओ जी। 
पुराने दिन सुहाने थे,उसे फिर खींच लाओ जी। 
हमे अच्छा नही लगता,किसी का दूर यूँ जाना। 
नही जाना मगर दिल से,कसम ये आज खाओ जी।  

मुझे सब याद आते हैं,गुजारे वो पुराने दिन। 
विचारों की लड़ी लेकर,सुनाए जो सुहाने दिन। 
सदा हम याद रक्खेंगे,वही सब काम आएगा। 
करेंगे याद मह हरपल,खयालों में फँसाने दिन।

चले जाना गमर ठहरो,जरा सा बात बाँकी है।
विदाई की घड़ी में कुछ अभी जजबात बाँकी है। 
दुआ मेरी यही है तुम सलामत ही सदा रहना। 
खुशी से झूम लो थोड़ा,अभी तो रात बाँकी है। 

दिलीप कुमार वर्मा 
बलौदाबाजार 3-1-2020


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