Saturday, 15 February 2020

सुगति छंद

सुगति छंद 

जगमग करे। दियना बरे।  
अँधियार मा। घर द्वार मा। 

सजधज रहे। चौंखट कहे। 
अब जागबो। खुश लागबो। 

भगवान के। गुणगान के। 
बेरा हरे। धीरज धरे। 

कुछ साल ले। बदहाल ले। 
अब बाँचबो। हम नाचबो। 

मुसकुल कटे। तब ले डटे। 
बिसवास हे। कुछ आस हे।  

बनवास ले।कुछ खास ले।  
आवत हवे। लावत हवे। 

आवव सबो। गावव सबो। 
धर आरती। कर आरती। 

दरशन करौ। अंतस धरौ। 
प्रभु आय हे। मन भाय हे।

दिलीप कुमार वर्मा

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