गजल
221 2122 221 2122
फोटो खिंचाय खातिर सब पेंड़ ला लगाथे।
गरुवा चरे कभू ता काहाँ बचाय आथे।
झन भाग के सहारा बइठे अगास जोहव।
मिहनत करे इहाँ जे,तेने ह दाम पाथे।
कतको पढ़े लिखे तँय,बइठे कहूँ निठल्ला
बेटा करे कमाई तब्भे ददा ह भाथे।
कतको बड़े खिलाड़ी,पर मान नइ ग पावय।
ओ नाम ला कमाथे मेडल जे जीत लाथे।
करके सखा भलाई,दरिया म फेंक दे तँय।
जे आसरा करे ते, मुँह के सदा ओ खाथे।
करथे कमाई भारी रहिथे तभो उधारी।
ओमन सदा खुशी हे, जेमन ह कुछ बचाथे।
सुनले दिलीप कहना,पुरखा बताय रसता।
पाथे बने ठिकाना,जेमन उही म जाथे।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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