सुगति छंद(शुभगति)
रुख ला लगा। दुख ला भगा।
कुछ सोंच जी। चल खोंच जी।
रुख काट के। नद पाट के।
अब का मिले। धरती हिले।
दूषित हवा। फइले रवा।
मरना करे। जिनगी डरे।
धरती तपे। पानी खपे।
बड़ प्यास हे। नइ आस हे।
जग काल हे।बिकराल हे।
जंजाल हे। बदहाल हे।
कुछ तो करा। बाँचय धरा।
अब जाग गा। झन भाग गा।
कुछ हे समे। अब भी थमे।
चल रुख लगा। किसमत जगा।
अब मान जा। चल खान जा।
रुख खोंच बे। झन सोंच बे।
दिलीप कुमार वर्मा
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