सवैया
जब पायल बाजत हे छम ले, जियरा धक ले धक ले कर जावय।
जब छम्मक छम्मक रेंगत हे, मन मोर मयूर बने इतरावय।
सुर ताल बजे मन अंतस मा, अउ पाँव तको हर नाँचन भावय ।
बउराय गए भकला सिरतो,अब गीत अलीन गलीन म गावय।
भगवान दया अतके करबे, जब देंह तजौं तब रेंगत राहँव।
सब तोर बनाय हवे दुनिया,मन मोर कहे बस देखन चाहँव।
गुन गान करौं रसपान करौं,नित साँझ बिहान रमायन काहँव।
अब काय करँव बतला प्रभु जी,कइसे मँय दर्शन तोर ल पाहँव।
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