Friday, 14 February 2020

सुगति छंद

सुगति छंद 

होली जले। बेरा ढले। 
जुरियाय हे। इतराय हे।  

बाजा बजा। अब झन लजा। 
गा फाग तँय। धर राग तँय।   

सब रंग हे। का जंग हे। 
पिचका चले। रँग मुख मले।    

लाली लगे। किसमत जगे। 
देखत भगे। नइ हे सगे। 

चिखला करे। मस्ती भरे। 
चल बोर दे। सब झोर दे।

भागत रहे। झन छू कहे। 
पकड़य सखा। दे दय चखा। 

होली हरे। कइसे डरे। 
जे आय जी। चिखलाय जी।  

करिया लगा। तुरते भगा।  
देवर कथे। सब चल जथे। 

भौजी रहे। कइसे सहे।  
रँग डार के। सब झार के।

सब आव जी। मिल जाव जी। 
झन बैर ले। अब खैर ले।

मिल ले गले। सब हें भले। 
होरी कहे। बस सुख रहे। 

दिलीप कुमार वर्मा


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