Wednesday, 26 February 2020

गजल

गजल
2122 1212 22
छंद सीखे सबो सधाये हे।
जेन साधे उही ह पाये हे।

खोल आँखी बने बने देखव।
कोन काला कहाँ लुकाये हे।

आज अठरा घलो कहाँ रहिथे।
देख टूरा टुरी भगाये हे।

ओ जवानी रहय जवानी जी।
चार बाई बबा चलाये हे।

आय हावय परी सरग ले जी।
देख मेंछा बबा मुड़ाये हे।
नाक अँगड़ी कभू करव झन जी।
जेन करथे ओ मार खाये हे।

चोर बनके चुराय हे दिल ला।
बेंच पइसा बहुत कमाये हे।

नाक नकटा के बाढ़ जाथे जी।
लाज ओला कभू न आये हे।

राम के नाम ला भजव भाई।
नाथ बिगड़ी सबो बनाये हे।

मौन रहिके रहय अपन घर मा।
मान जिनगी बने पहाये हे।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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