गजल
2122 1212 22
छंद सीखे सबो सधाये हे।
जेन साधे उही ह पाये हे।
खोल आँखी बने बने देखव।
कोन काला कहाँ लुकाये हे।
आज अठरा घलो कहाँ रहिथे।
देख टूरा टुरी भगाये हे।
ओ जवानी रहय जवानी जी।
चार बाई बबा चलाये हे।
आय हावय परी सरग ले जी।
देख मेंछा बबा मुड़ाये हे।
नाक अँगड़ी कभू करव झन जी।
जेन करथे ओ मार खाये हे।
चोर बनके चुराय हे दिल ला।
बेंच पइसा बहुत कमाये हे।
नाक नकटा के बाढ़ जाथे जी।
लाज ओला कभू न आये हे।
राम के नाम ला भजव भाई।
नाथ बिगड़ी सबो बनाये हे।
मौन रहिके रहय अपन घर मा।
मान जिनगी बने पहाये हे।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार
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