Wednesday, 26 February 2020

गजल

गजल
तर जथे कतको जपे श्री राम के।
झन समझ येला हरे बस नाम के। 

जाप कर हर काम के सँग राम ला।
पुण्य पाबे तीर्थ चारो धाम के।

फेंक झन कचरा समझ के राह मा।
कोन जाने कोन हर हे काम के।

जेन करथे काम निसदिन खान मा।
काय चिंता ओ करे ये घाम के। 

जेन ऐसी मा सदा बइठे रहय। 
तेन के चिंता अपन बस चाम के।

भात ला झन फेंक जादा मांग तँय।
बाप हर जानय रहे का दाम के।

चार साथी मिल जथे बतियाय बर।
बन जथे माहौल हर दिन शाम के।  

हे बुरा ये काम जानत हे सबो।
पर चलाथे दौर बइठे जाम के।

तन बदन हो पस्त बूता काम मा।
तब समझ आथे करँव का बाम के।

बालपन बाबा चलय धर हाथ ला।
अब ददा के हाथ चलथे थाम के। 

जेन मन मिहनत करे निसदिन दिलीप।
तेन मन का सोंचही आराम के।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदा बाज़ार

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