Friday, 7 February 2020

पद-पादाकुलक छंद

पद-पादाकुलक छंद 

सुरता आवत रहिथे मोला। 
का का सखी बतावँव तोला। 
रतिहा निदिया हर नइ आवय। 
सपना तक मा कुकुर कुदावय। 

भूँकत रहिथे भों भों करके। 
जिवरा काँपत रहिथे डरके। 
कोन जनी ओ कब आ जाही। 
भूत बने मोला खा जाही। 

काली रयपुर जावत बेरा। 
कुकुर सड़क मा डारे डेरा। 
गाड़ी मा ओ हर रेतागे।
कनिहा टूटे तइसे लागे।  

अबड़े ओ नरियाये लागिस। 
तनिक सड़क ले ओ नइ भागिस। 
येती ओती हबकत राहय।  
बिलख बिलख के कुछ कुछ काहय। 

देख कुकुर के हालत बहिनी। 
अंतस मोरो  होय असहिनी। 
तड़फ तड़फ के कुकुर ह मरगे। 
घटना मोरो अंतस भरगे। 

अब ओ हर सुरता मा आथे। 
भों भों करके अबड़ सताथे। 
तहीं बता कइसे बच पाहूँ। 
कइसे ओला मँय बिसराहूँ। 

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार






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