Friday, 7 February 2020

आनंद वर्द्धक छंद

आनंद वर्द्धक छंद 

2122 2122 212 

जे परीक्षा दे , उही हर जानथे। 

अंक कइसे कर सखा,ओ लानथे। 

रात दिन मिहनत करे, सब त्याग के। 

रोज करथे कोर्स पूरा, जाग के। 

हर समे चिंतन करे, सब बात ला। 

जाग के हरदम गुजारय, रात ला। 

पाठ एक्को नइ छुटय, फिर भी डरे। 

कोन जाने कोन के, उत्तर हरे। 

सोंच के दुबरा जथे, का होय जी। 

पढ़ डरे तब्भो ,हमेसा रोय जी। 

दिन परीक्षा के रहे, नज़दीक जी। 

बढ़ जथे धड़कन, रहे नइ ठीक जी। 

खा डरवँ तइसे सबो, पुस्तक पढ़े। 

देवता ला भेंट दे,मन ला गढ़े। 

रोज के अभ्यास ले, सब हो जथे। 

जेन पाये हे सफलता, ते कथे। 

झन डरा सब ठीक होही, माँ कथे। 

आज हे परिणाम, डर मन मा रथे। 

रंग मिहनत के रथे, चोखा सदा।

का परीक्षा ले डरे, मारव गदा। 

गर पढ़े ईमान से ता, झन डरा। 

प्रश्न के उत्तर बता, डर ला हरा। 

दिलीप कुमार वर्मा

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