पद्धरि छंद
आनी बानी के साग भात।
मनखे मन खावय रात रात।
जाने कुछ होवय खास बात।
आये राहय लगथे बरात।
सज के आये सब साथ साथ।
घूमत राहय सब थाम हाथ।
खाना खाये के बेर आय।
मानो लागे जम्मो झपाय।
धर के थारी सब टूट जाय।
मानो गाड़ी हर छूट जाय।
हलवा पूड़ी सब्जी डकार।
तनिया के खावय भात दार।
थारी थारी राखय निकाल।
लगथे भीतर भारी बवाल।
डोसा गुपचुप सब खाय जाव।
छीनव झपटव तब्भेच पाव।
खावत हे जम्मो फेंक फेंक।
लूटय रसगुल्ला छेंक छेंक।
फोकट के खाना आय जान।
सब ठूंसत हावय पेल मान।
पश्चिम के येहर भोज ताय।
पूर्वी मनखे मन तक झपाय।
खाना अपमानित होय रोज।
अइसन ले झन करवाव भोज।
दिलीप कुमार वर्मा
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