Wednesday, 26 February 2020

सवैया

सवैया 112*8+2
कतका करबे करके मरबे,कुछ काम कभू निपटे नइ भाई।
कतको करथे करके रहिथे,कुछ कारण काम न हो करलाई।
चलते रहिथे ग समे चकरी,कुछ आवत जावत हे दुखदाई।
अब छोड़व काम समे करही,तुम खेलव खाव बजा शहनाई।

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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