सवैया 112*8+2 कतका करबे करके मरबे,कुछ काम कभू निपटे नइ भाई। कतको करथे करके रहिथे,कुछ कारण काम न हो करलाई। चलते रहिथे ग समे चकरी,कुछ आवत जावत हे दुखदाई। अब छोड़व काम समे करही,तुम खेलव खाव बजा शहनाई।
दिलीप कुमार वर्मा बलौदाबाजार
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