गजल
2122 2122 212
देश के रक्षा करे बर जे लड़े।
ते सिपाही हिन्द मा सबले बड़े।
कोन दुश्मन आ सके घर मा हमर।
वीर सैनिक देश के सीमा खड़े।
पाक आइस हाथ धर आतंक के।
गाल मा तेकर तमाचा हम जड़े।
जेन के नीयत म कोनो खोट हे।
मान ले ओ हिन्द के धरती गड़े।
चीन तक सोंचे कदम रखहूँ इहाँ।
भाग जाथे देख के ओ बिन लड़े।
आज हमरो देश के बड़ नाम हे।
जानथे ताकत हमर सबले बड़े।
हे तिरंगा के कसम तोला दिलीप।
आन के रक्षा करे हरपल अड़े।
दिलीप कुमार वर्मा
बलौदा बाज़ार
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