Friday, 7 February 2020

पीयूष वर्षी छंद

पीयूष वर्षी छंद 

2122 2122 212

वाह रे सरपंच, जिनगी झोंक दे। 
बेंच दे घर द्वार, जबरन ठोंक दे। 

खूब बाँटे माल, कुकरी बोकरा। 
तँय पिलाये प्लेन, झूमय डोकरा। 

खर्च कर दे लाख, पाबे का बता। 
तँय रहीसी मार, हमला झन जता। 

खार नइ हे खेत, घर नइ गाँव मा। 
का बिताबे रात, पीपर छाँव मा? 

हार जाबे जंग, करबे का बता। 
तोर घर परिवार, होही लापता। 

कोन देही ठौर, तोला गाँव मा। 
नींद तक नइ आय, पीपर छाँव मा। 

जीत जाबे जंग, सबकुछ वारबे।
रोज दारू माँग, जिनगी हारबे। 

तोर हे नुकसान, सुन हर हाल मा। 
छोड़ दे तँय जंग, फँस झन काल मा। 

दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार

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